शीर्षक : मेरा कृष्णा
विधा : तांटक छंद
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पाप बढे जब भी धरती पर,तुमको सभी पुकारे है ।
रूप लिया गिरधर तब तुमने,आकर कष्ट उबारे है ।
कोइ कहे मन मोहन छलिया,काली कमली वारे है ।
जसुदा के लल्ला मतवारे, मेरे गिरधर प्यारे है ।
शीर्षक : मेरा कृष्णा
विधा : तांटक छंद
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पाप बढे जब भी धरती पर,तुमको सभी पुकारे है ।
रूप लिया गिरधर तब तुमने,आकर कष्ट उबारे है ।
कोइ कहे मन मोहन छलिया,काली कमली वारे है ।
जसुदा के लल्ला मतवारे, मेरे गिरधर प्यारे है ।

उत्कर्ष कवितावली का संचालन कवि / लेखक नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष द्वारा किया जा रहा है। नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष मूल रूप से राजस्थान के भरतपुर वैर तहसील के गांव गोठरा के रहने वाले हैं।
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